पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी (Former Prime Minister Late Atal Bihari Vajpayee) द्वारा दी गयी कूड़े से बिजली बनाने की परियोजना चड़ी भ्रष्टाचार (Corruption) की भेंट।

Lucknow: पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी (Former Prime Minister Late Atal Bihari Vajpayee) द्वारा दी गयी कूड़े से बिजली बनाने की परियोजना चड़ी भ्रष्टाचार (Corruption) की भेंट। ऐसा दावा किया गया था कि यह देश का सबसे बेहतर डब्ल्यूटीई (Waste to energy) प्लांट होगा। कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट लगाये तो गए थे लेकिन इन प्लांट से बिजली नही बन पाई। अब तक कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट पर 80 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं।       

बता दें , करोड़ों खर्च किये जाने के बाद भी प्लांट कूड़े से बिजली बनाने में अस्मार्थ्य रहा। उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (Uttar Pradesh New and Renewable Energy Development Agency), नगर निगम और निजी कंपनी की लापरवाही के फल स्वरूप फिलहाल प्लांट के बहार सुरक्षा गार्ड तैनात है और अन्दर लगी मशीन जंग खा रही हैं। चेन्नई की एशिया बायोएनर्जी (Asia Bioenergy) कंपनी को यह काम दिया गया था, लेकिन कंपनी ने कूड़े को अनुपयोगी बताकर उसका उपयोग करने से मना कर दिया। ऐसा दावा किया गया था कि आधा मेगावाट बिजली बिजली बनने लगी थी,  जिसका उपयोग परियोजना स्थल (project site) पर ही किया जा रहा था। 

वहीं, कुछ समय बाद कूड़े की गुणवत्ता को लेकर नगर निगम और एशिया बायोएनर्जी (Municipal Corporation and Asia Bioenergy) के बीच जंग शुरू हो गई। कंपनी के अफसरों का दावा था कि सडऩे वाला गीला कूड़ा दिया जा रहा है और कूड़े में सिल्ट आ रही है, जिस कारण मशीनें चोक हो गई हैं। नगर निगम द्वारा दिए गए कूड़े के 25 प्रतिशत भाग को कम्पनी ने अनुपयोगी बताते हुए रिजेक्ट कर दिया। नगर निगम आयुक्त डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी (Municipal Corporation Commissioner Dr. Indramani Tripathi) ने बताया कि प्लांट कर्ज अदा न होने के कारण बंधक है। सभी मशीनें पूरी तरह से बेकार हो चुकी हैं और अब नई परियोजना तैयार हो रही है।