मगरमच्छ रेप्टीलिया यानी सरीसृप वर्ग के सबसे बड़े जंतुओं में एक है। यह 4 से 25 मीटर तक लंबा हो सकता है।
क्या कभी दो पैरों पर चलते थे मगरमच्छ ?

--धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी

मगरमच्छ रेप्टीलिया (crocodile) यानी सरीसृप वर्ग के सबसे बड़े जंतुओं में एक है। यह 4 से 25 मीटर तक लंबा हो सकता है। मगरमच्‍छ चार पैरों पर चलने वाला प्राणी है, लेकिन क्‍या आपने कभी दो पैरों पर चलने वाले मगरमच्छ के बारे में सुना है? अब तक यह कल्पना से परे था लेकिन वैज्ञानिकों की टीम की पुरातात्विक खोज से यह पता चला है कि कभी दो पैर पर चलने वाले मगरमच्‍छ (2 legged crocodile) भी होते थे।

प्राचीन मगरमच्छों के बारे में लंबे समय से यही मान्‍यता है कि वे अपने आधुनिक वंशजों की तरह ही चार पांवों पर चलते थे। हालांकि अब एक नए अध्‍ययन में उनके दो पैरों पर चलने की संभावना जताई गई है। चीन (China), ऑस्ट्रेलिया (Australia) और अमेरिका (USA) के कुछ शोधकर्ताओं ने दक्षिण कोरिया (South Korea) के जींजू फॉर्मेशन में पैरों के कुछ निशान ढूंढने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। यह रिसर्च ‘नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट’ (Nature Scientific Report) में छपी है। दक्षिण कोरिया का यह इलाका पुरातत्व के लिहाज से बेहद समृद्ध है। यहां पर छिपकिली, मकड़े और शिकारी पक्षी रैप्टर की कुछ प्रजातियों के 12 करोड़ साल पुराने अवशेष मिले हैं।

शोधकर्ताओं (researcher) का मानना है कि जिन मगरमच्छों के कदमों के निशान मिले हैं, वे कम से कम तीन मीटर लंबे थे । ये मगरमच्छ तनी हुई रस्सी पर चलने वाले बाजीगरों की तरह दो पैरों पर चलते थे। चिंजू नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एजुकेशन के क्युंग सू किम का कहना है, ‘वो ऐसे ही चल रहे थे जैसे कि डायनोसॉर, लेकिन पैरों के ये निशान डायनोसॉर के नहीं हैं।’

पहले शोधकर्ताओं को लगा था कि ये निशान टेरोसॉर (Pterosaur)  के हैं, जो डायनोसॉर (dinosaur) की ही एक प्रजाति है लेकिन उसके पंख होते थे। यह डायनोसॉर 6.6 करोड़ साल पहले तक धरती पर मौजूद था। हालांकि अब इन्हें क्रोकोडाइलोमॉर्फ फैमिली का एक सदस्य माना जा रहा है, जिसकी अब तक खोज नहीं हुई थी। करीब 10 इंच लंबे पैरों के निशान से मगरमच्छ के इस रिश्तेदार के आकार का आकलन किया गया है।

क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के जीवाश्म विज्ञानी एंथनी रोमिलियो भी इस रिसर्च के लेखकों में शामिल हैं। रोमिलियो का कहना है कि पैरों के निशान किसी वयस्क इंसान के जितने ही लंबे हैं। हालांकि इनके शरीर की लंबाई तीन मीटर से ज्यादा तक की रही होगी। इसका मतलब है कि वह अपने समकालीन रिश्तेदारों की तुलना में करीब दोगुना लंबा था। यह प्राचीन मगरमच्छ मुमकिन है कि दो पैरों पर चलता रहा होगा और इंसानों की तरह ही अपनी एड़ी घसीटता होगा। यही वजह है कि इसके पैरों के निशान काफी गहरे हैं।

जब प्रयोगशाला में इन मगरमच्छों का मॉडल बनाने की कोशिश की गई तो पता चला कि इनका गुरुत्व केंद्र बहुत कम था। रोमिलियो ने बताया कि खुदाई वाली जगह पर न तो हाथों के निशान मिले और न ही पूंछ के। साथ ही इसके चलने का मार्ग भी पतला है। इन सब कारणों से इस संभावना को बल मिलता है कि यह दो पैरों पर चलता रहा होगा।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से क्रिटेशस काल के दूसरे जीवों के बारे में भी नई जानकारियां सामने आएंगी। टेरोसॉर उसी दौर का जीव है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नई खोज के बाद जीवाश्म मिलने की कुछ दूसरी जगहों पर भी मिले जीवाश्मों का भी नए सिरे से अध्ययन किया जाना चाहिए।