दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR)में पिछले दो महीनों में कई बार भूकंप ( earthquake) के झटके महसूस किये गए हैं।
बड़े भूकंप आने का कारण है 'शीयर वेव्स', वैज्ञानिकों को धरती के नीचे मिली एक नई संरचना

नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR)में पिछले दो महीनों में कई बार भूकंप ( earthquake) के झटके महसूस किये गए हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों (scientists) का सरदर्द बढ़ गया है। वो इन भूकंप के वाजिब कारणों का पता लगाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। इसी बीच वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता और नई जानकारी हाथ लगी है। उन्होंने धरती के नीचे एक नई संरचना (New Structure) की खोज की है जो कोर केंद्र के पास होती है। यहां से उठने वाली एक खास तरंग की आवाज़ इन भूकंप का कारण बनती है। जिन्हें 'शीयर वेव्स' (Shear Waves) कहते हैं।

अभी तक वैज्ञानिकों को मौजूदा जानकारी के अनुसार लग रहा था कि ये भूकंप धरती के बीच में होने वाली हलचल यानी सिस्मिक गैप (Seismic gap) या फॉल्ट लाइन Foot line) की वजह से आते हैं। लेकिन शोध के दौरान उन्हें चौकाने वाली नई जानकारी हाथ लगी है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने बताया कि पृथ्वी के 2900 किलोमीटर नीचे बड़ी संरचनाएं मौजूद हैं। ये पृथ्वी के भीतर मौजूद दूसरी परत यानी पिघली हुई कोर (Core) और उसके ऊपर की परत के मध्य स्थित है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन संरचनाओं का व्यास (Diameter) हज़ार किलोमीटर तक है और ये 25 किलोमीटर तक गहरी हैं। 

क्या हैं शीयर वेव्स?

दरअसल शीयर वेव्स ऐसी तरंगें होतीं है जो धरती के कोर केंद्र और बाहरी परत यानी धातु की परत के बीच की संरचना से आती हैं। जब भी आंतरिक संरचना में कोई बदलाव आता है तब इन तरंगों से एक तरह की ध्वनि निकलती है। बड़े भूकंप आने पर इनकी आवाज़ और तेज़ हो जाती है।

बड़े भूकंप की वजह का पता लगाने के लिए व अन्य चीजों की जानकारी हासिल करने के लिए अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने खीज की है।  उन्होंने साल 1990 से लेकर 2018 तक प्रशांत महासागर में आए 7000 भूकंप के आंकड़ों का अध्ययन किया जिनमें कुछ बड़े भूकंप भी शामिल थे। शोध में  पता चला कि  जिसे वे अल्ट्रा लो वेलोसिटी जोन कह रहे हैं, उसमें ये भूकंप तरंगे धीमी गति से गुजरती हैं। हालांकि कई साल तक वैज्ञानिक ये नहीं समझ पाए कि ये तरंगे आती कहां से हैं लेकिन अब उन्हें उनकी खोज ऐसे मोड़ पर आकर खत्म हुई जंहा उन सफलता हाथ लगी है। वैज्ञानिकों ने सीक्वेन्सर नाम के एक  मशीन लर्निंग एलगोरिदम का उपयोग करके तरंगों के बारे में जानने की कोशिश की है। इस एलगोरिदम को जॉन्स हॉपकिंस यूनवर्सिटी और तेलअवीव यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विकसित किया। 

तेज़ भूकंप पर निकलती है खास तरंगे

रिक्टर स्केल पर 6.5 या इससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप में खास तरह की इको वाली तरंगे निकलती हैं। जिसका अभी तक पता नहीं लग पाया है। इन्हें ही शीयर वेव्स कहते हैं। ये वेव्स जहां बहुत सारे भूकंप रहे थे वहां ये एक जैसी थीं। शोध के प्रमुख लेखक डायोन किम (Dayon Kim) ने बताया कि उन्हें कोर-मैंटल (Core-mental) की सीमा से आने वाले हजारों ईको पर फोकस (Focus) करने पर पाया कि इस सीमा पर ऐसी संरचनाएं हैं जो खास ध्वनि ( Sound) निकालती हैं। 

हवाई द्वीपों (Hawai Island's)  के नीचे यूएलवी जोन (ULV zone) को जितना बड़ा समझा गया था ये उससे भी कहीं अधिक बड़ी हैं। वैज्ञानिकों ने  कहा कि, उन्हें हवाई और मार्केसस द्वीपों (Marquesas Island) के नीचे इतना बड़ा इलाका मिलेगा जिसके बारे में अभी तक सब अनजान थे। यह इलाका कोर (Core) और मैंटल (Mantel) के बीच है। ये बहुत ही गर्म और ज्यादा घनत्व वाला क्षेत्र है।